Kuppusaamy on Bill Gates! 😉

Just heard, Bill Gates has resigned as the ‘Chairman of Microsoft’ after receiving a letter from kuppusaamy.
It reads:

Saar,

I have some questions for you…. Please yanswer them:

Namba wan) The keyboard alphabets are not in order, when will you launch the correct version?

Namba too) There is yeh ‘Start’ button… but no ‘Stop’ button… Rascalaa, where it is?

Namba tree) I have already learned Microsoft Word, when are you “laanching” Microsoft Sentence?

Namba for) There is yeh Recycle bin… but…there is nobody coming to collect that bin. Why???

Namba fife) Your name is Bill… But in India they orr selling computers without Bill… Why???

Yand finally yeh personal question: 
Your surname is Gates… But you are selling Windows… Why saar why??
😉 😜 😆

Self Worth

A motivitional guru pulls out a five hundred rupee note, in a meeting with his disciples, and hold it up for all to see.

He just asked a simple question. “How much is this worth?”

“Five Hundred rupees!” the crowd yelled in unison.

“Right,” said the speaker.

He then took the note and crumpled it into a ball and asked “How much is it worth now?”

“Five Hundred rupees!” screamed the audience.

He then threw the note on the ground, stamped all over it and picked up the note and asked one more time: “And how much is it worth now?”

“Five Hundred rupees!” was the response.

“I want you to remember this,” said the speaker.

“Just because someone crumples it, or stamps on it, the value of the note does not diminish.
We should all be like the five hundred rupee note.
In our lives, there will be times when we feel crushed, stamped over, beaten. But never let your self-worth diminish.
Just because someone chose to crush you – that doesn’t change your worth one bit!
Don’t allow your self-worth to diminish because someone says something nasty or does something dirty to you.”

🌿🌿पत्नियों के प्रिय जुमले 🌿🌿

🌿🌿पत्नियों के प्रिय जुमले 🌿🌿
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यदि आप इनसे वंचित हैं तो यकीन मानिए कि आप बहुत सौभाग्यशाली है।
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🎋शादी के तीन महीने बाद 🎋

क्या कर रहे हैं ? कोई आ जाएगा, थोड़ी बहुत शर्म-वर्म है कि नहीं ?

🎋शादी के चार महीने बाद 🎋

सोने दो, तुम्हारी माँ चाहती है कि सुबह छः बजे मैं मन्दिर में उनके साथ 🔔 घंटियां बजाऊँ।

🎋छह महीने बाद 🎋

मेरे मैके नहीं तो, अपनी ससुराल ही ले चलो।

🎋दस महीने बाद 🎋

एेसी हालत में शर्मा जी अपनी पत्नी का कितना ध्यान रखते हैं, और एक तुम हो की?

🎋बारह महीने बाद 🎋

अपनी माँ की तरह बातें मत करो, लडका हो या लडकी क्या फर्क पड़ता है?

🎋पन्द्रह महीने बाद 🎋

जब तुम दुबले-पतले हो तो गुडिया आठ पॉऊण्ड की कैसे होती, हर बात में मुझे ही दोष देते हो।

🎋अट्ठारह महीने बाद 🎋

हाँ-हाँ सब गुडिया से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन चेन, अंगुठी तो मेरे मैके वालों ने ही दी, देख लिया सबका प्यार।

🎋दौ साल बाद 🎋

बिट्टो को बुखार है, और तुम आफिस की फाइलों में सर खफा रहे हो? तुममें अक्ल नाम की कोई चीज है कि नहीं?  

🎋तीन साल बाद 🎋

कॉन्वेंट में ही डालेंगे, नहीं तो अपने बाप की तरह रह जाएगी, और तुम तो इस मामले में नहीं बोलो तो ही अच्छा है।

🎋चार साल बाद 🎋

अब तुम्हारा भी एक परिवार है, कब तक माँ बाबूजी के पल्लू से चिपके रहोगे? बड़े भैया को देखो, कितनी चतुराई से अलग हो गये।

🎋 पांच साल बाद 🎋

नौकरी बदलो, ओवर टाईम करो, डाका डालो, अब हमारे खरचे बढ़ गये हैं, पप्पू के खिलौने तक नहीं खरीद पाती, जबकि पप्पू की डिलिवरी तक मेरे मैके मे हुई है, यह कोई रिवाज है भला?

🎋छह साल बाद 🎋

ये मकान ठीक नहीं है, एक रूम कम पडता है।

🎋सात साल बाद 🎋

बच्चों के चक्कर में मुझे तो बिल्कुल भूल ही गये, पांच साल से एक अंगुठी तक नहीं दिलवाई।

🎋आठ साल बाद 🎋

नासिक वाले इंजिनियर ने कितने कितने चक्कर काटे थे, पर मुझे तो तुम्हारे साथ ही बर्बाद होना था।

🎋 नौ साल बाद 🎋

कोई अहसान नहीं करते हो, जो कमा कर खिलाते हो, सभी खिलाते हैं।

🎋दस साल बाद 🎋

बच्चों के नम्बर नहीं आये तो मैं क्या करूं ? अकेली दोनों को पढाती हूँ। तुम्हारे पास न तो टाइम है, ना इन्हे पढाने की अकल।

🎋ग्यारह साल बाद 🎋

खर्चा कम नहीं होगा, कमाई बढ़ाने की चिन्ता करो, और बाबूजी के पी.एफ. का क्या हुआ? मकान के वक्त तो कुछ दिया नहीं, अब जरा सी हेल्प नहीं कर सकते, या राम, भरत को ही देंगे, राजगद्दी?

🎋बारह साल बाद 🎋

मेरे पापा ने मेरी शादी की जिम्मेदारी ली थी, तुम्हारी बहन, भतीजियों की नहीं, शादियों में इतना वक्त दे रहे हैं, यह कम है क्या?

🎋तेरह साल बाद 🎋

ट्रान्सफर हो गया है तो मैं क्या करूं? मैं अपने बच्चों के साथ कहीं नही जाने वाली।

🎋चौदह साल बाद 🎋

क्या खाक मजा आया, बच्चे तो बोर हो गये, तुममें स्टेशन ढूंढने की भी तमीज नहीं है, और होटल भी क्या था.., धर्मशाला जैसा।

🎋पन्द्रह साल बाद 🎋

लौट आये ना? पहले ही कोशिश करते तो ट्रान्सफर होता ही नहीं, लेकिन तुममें इतनी स्मार्टनेस कहाँ है?

🎋सोलह साल बाद 🎋

बच्चे बड़े हो गये हैं, उनसे ढंग से बात किया करो, ये मेरा घर है, तुम्हारा दो टके का आफिस नहीं।

🎋सत्रह साल बाद 🎋

बच्चे घूमने चले गये तो कौन-सा पहाड टूट गया, सब जाते हैं। तुम्हारे भरोसे तो केवल सब्जीमंडी देख सकते हैं.., बात करते हो।

🎋अट्ठारह साल बाद 🎋

डाक्टर ने आराम करने को कहा है, पर मेरी जान तो घर का काम करते – करते ही निकल जायेगी।

🎋उन्नीस साल बाद 🎋

हो जाता है इस उम्र में, बिट्टो को समझा दिया है, अब वो देर रात तक बाहर नहीं रहेगी, पर तुम शुरू मत हो जाना।

🎋बीस साल बाद 🎋

मोटर साइकिल चलाएगा तो गिरेगा ही, पहले ही कहा था, कार दिला दो, तब तो बजट का रोना रो रहे थे।

🎋इक्कीस साल बाद 🎋

डायबिटीज हो गयी है तो मै क्या करूं ? जुबान पर तो लगाम है नहीं, तीन-तीन बार मीठा ठूंसते रहते हो, दवा लो ।

🎋बाइस साल बाद 🎋

ये गीता भाभी का इतना ध्यान क्यों रखते हो? इस उम्र में नाक कटवाओगे क्या?

🎋तेईस साल बाद 🎋

अपने भाईयों के साथ बिजनेस नहीं करोगे। बस एक नौकरी तो ठीक से होती नहीं.., बिजनेस करेंगे, वो भी शातिरों के साथ।

🎋चौबीस साल बाद 🎋

हाँ-हाँ, तो अपने बूते पर ही की है, अपनी बिट्टो की शादी, तुम्हारे परिवारवाले तो मेहमान बन कर आये थे, मेरा भाई नहीं आता तो लडकी की डोली तक नहीं उठती।

🎋पच्चीस साल बाद 🎋

रहने दो, काहे की सिल्वर जुबली, मेरा तो जिगर और फिगर दोनो खराब करके रख दिया तुमने। अच्छा मना लो, पर ज्यादा पटर-पटर मत करना और सब से गिफ्ट भी लेना, हमने भी पचासों जगह बांटी है।

🎋छब्बीस साल बाद 🎋

पढी – लिखी बहू है तो अपने ढंग से रहेगी ही, कानपुर वाली तो तुम बाप-बेटे को जमीं नहीं, अब भुगतो।

🎋सत्ताईस साल बाद 🎋

ससुर-नाना हो गये हो, ये फटे पाजामें में हाल में मत आया करो, मुझे शर्म आती है।

🎋अट्ठाईस साल बाद 🎋

तुम्हे जाना है तो जाओ, मै कहीं नहीं जाऊँगी, पोते को कौन सम्भालेगा? बहू में अक्ल है क्या?

🎋उन्तीस साल बाद 🎋

कोई मन्दिर-वन्दिर नहीं, तीस साल हो गये घंटियाँ बजाते, क्या दिया भगवान् ने, तंगी में ही जी रहे हैं न। 

🎋तीस साल बाद 🎋

देख लो, बीमारी में मैं ही काम आ रही है, बडा दम भरते थे भाई-भाभी का, कोई झांकने तक नहीं आया, चिल्लाओ मत, अभी खांसी शुरू हो जायेगी।

🎋इकत्तीस साल बाद 🎋

आपरेशन से पहले वी.आर एस ले लो, क्या पता बाद में नौकरी करने लायक रहो ना रहो?

🎋बत्तीस साल बाद 🎋

सुबह से हल्ला मत मचाया करो, पचास काम होते हैं घर में, मै तुम्हारी तरह रिटायर नहीं हूं, सुबह से शाम तक सबके लिये खटती हूँ।

🎋तैंतीस साल बाद 🎋

भैया आप तो इन्हें ले जाओ, सुबह से शाम तक सबका जीना हराम कर रखा है, परेशान हो गये हैं, क्या मुसीबत है?

🎋चौंतीस साल बाद 🎋

पप्पू, सारे पेपर अपने नाम करवाले बेटा, अब तेरे पापा का कोई भरोसा नहीं, तबीयत सम्भल भी गयी तो दिमाग की क्या गारंटी है?

🎋पैंतीस साल बाद 🎋

क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा। थोडी शर्म-वर्म है कि नहीं?

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अंत में..  पतियों के लिए..
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🌼जिस किसी भी पडाव में है, भुगतते रहे, कुढते रहे।
नमस्कार..! ;)😝😂

जीवन की प्रार्थमिकता

किसी जंगल मे एक गर्भवती हिरणी थी जिसका प्रसव होने को ही था। उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा। अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने लगी, लगभग उसी समय आसमान मे काले-काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी जिससे जंगल मे आग भड़क उठी। वो घबरा गयी उसने अपनी दायीं ओर देखा, लेकिन ये क्या?
वहां एक बहेलिया उसकी ओर तीर का निशाना लगाये हुए था, उसकी बाईं ओर भी एक शेर उस पर घात लगाये हुए उसकी ओर बढ़ रहा था अब वो हिरणी क्या करे?
वो तो प्रसव पीड़ा से गुजर रही है, अब क्या होगा? क्या वो सुरक्षित रह सकेगी? क्या वो अपने बच्चे को जन्म दे सकेगी? क्या वो नवजात सुरक्षित रहेगा? या सब कुछ जंगल की आग मे जल जायेगा? अगर इनसे बच भी गयी तो क्या वो बहेलिये के तीर से बच पायेगी? या क्या वो उस खूंखार शेर के पंजों की मार से दर्दनाक मौत मारी जाएगी – जो उसकी ओर बढ़ रहा है? उसके एक ओर जंगल की आग, दूसरी ओर तेज धार वाली बहती नदी, और सामने उत्पन्न सभी संकट.., अब वो क्या करे?
लेकिन फिर उसने अपना ध्यान अपने नवआगंतुक को जन्म देने की ओर केन्द्रित कर दिया। फिर जो हुआ वो आश्चर्यजनक था।
कड़कड़ाती बिजली की चमक से शिकारी की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, और उसके हाथों से तीर चल गया और सीधे भूखे शेर को जा लगा। बादलों से तेज वर्षा होने लगी और जंगल की आग धीरे धीरे बुझ गयी। इसी बीच हिरणी ने एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया।
ऐसा हमारी जिन्दगी में भी होता है, जब हम चारो ओर से समस्याओं से घिर जाते हैं, नकारात्मक विचार हमारे दिमाग को जकड़ लेते हैं, कोई संभावना दिखाई नहीं देती, हमें कोई एक उपाय करना होता है, उस समय कुछ विचार बहुत ही नकारात्मक होते है, जो हमें चिंता ग्रस्त कर कुछ सोचने समझने लायक नहीं छोड़ते। ऐसे मे हमें उस हिरणी से ये शिक्षा मिलती है की हमें अपनी प्राथमिकता की ओर देखना चाहिए, जिस प्रकार हिरणी ने सभी नकारात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होने पर भी अपनी प्राथमिकता “प्रसव”पर ध्यान केन्द्रित किया, जो उसकी पहली प्राथमिकता थी, बाकी तो मौत या जिन्दगी कुछ भी उसके हाथ में था ही नहीं, और उसकी कोई भी क्रिया या प्रतिक्रिया उसकी और गर्भस्थ शिशु की जान ले सकती थी! उसी प्रकार हमें भी अपनी प्राथमिकता की ओर ही ध्यान देना चाहिए। हम अपने आप से सवाल करें, हमारा उद्देश्य क्या है, हमारा फोकस अर्थात केंद्रबिन्दु क्या है? हमारा विश्वास, हमारी आशा कहाँ है, ऐसे ही मझधार मे फंसने पर हमें अपने इश्वर को याद करना चाहिए, उस पर विश्वास करना चाहिए जो की हमारे ह्रदय में ही बसा हुआ है.., जो हमारा सच्चा रखवाला, हितैषी और साथी है।

फूटा घड़ा

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बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था।

उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एक दम सही था। इस वजह से रोज़ घर पहुँचते – पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था। ऐसा दो सालों से चल रहा था।

सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पहुँचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है। फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा, “मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ?”

“क्यों?“, किसान ने पूछा, “तुम किस बात से शर्मिंदा हो?”

“शायद आप नहीं जानतें पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुँचा पाया हूँ, मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है, और इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही है।”, फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा।

किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला, “कोई बात नहीं, मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को अवश्य देखो।”

घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया, ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचते – पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा।

किसान बोला, “शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थें वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था, और मैंने उसका लाभ उठाया। मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग – बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे, तुम रोज़ थोड़ा – थोड़ा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया। आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ। तुम्ही सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता?”

दोस्तों, हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं। उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए, और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा।

(यह उद्धरण मेरी रचना नही है। सिर्फ शेयर की जा रही है।)

The Unconditional Love … !

I read this story somewhere, I don’t know … just posting it here … for it touches the heart so easily!

Once upon a time, a man punished his five-year-old daughter for using up the families only roll of expensive gold wrapping paper before Christmas.

Money was tight, so he became even more upset when on Christmas eve, he saw that the child had used the expensive gold paper to decorate a large shoe-box she had put under the Christmas tree.

nevertheless, the next morning the little girl, filled with excitement, brought the gift box to her father and said, ” This is for you, Daddy!”

As he opened the box, the father was embarrassed by his earlier over-reaction, now regretting how he had punished her.

But when he opened the shoe-box, he found it was empty and again his anger flared up. “Don’t you know young lady …,” He said harshly, “when you give someone a present there is supposed to be something inside the package!”

The little girl looked up at him with sad tears rolling down the cheeks and whispered with emotionally choked voice, “Daddy, it is not empty … I blew kisses into it until it was all full.”

The father was crushed. He fell on his knees and put his arms around his precious little one. he begged her to forgive him for his unnecessary anger.

It is said, an accident took away the life of the child only a short time later. The father kept this little gold box by his bed for all the years of his life. Whenever he was discouraged or faced difficult problems, he would open the box take out an imaginary kiss and remember the love of this beautiful child who had put it there.

In a very real sense, each of us human beings have been given this invisible golden box filled with unconditional love, affection and kisses from our children, families, friends and God.

So, you too just open your golden box and feel the love … because, there is no more precious possession anyone could hold!

मुसद्दी लाल की गवाही (SKIT FOR SEWAK DAY 2010)

Mussaddi lal ki gawah

courtroom i

CAST:

  1. जज
  2. वकील
  3. गवाह

SCENE 1: COURTROOM: INTERNAL: DAY

सुत्रधार:

आप में से कई लोग कचहरी जातें हैं .. अपने केस मुकदमे के चक्कर में! कुछ लोग जज हैं .. कुछ वकील हैं, वे भी कचहरी जातें हैं .. पर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो ना जज हैं ना वकील फिर भी उनका कचहरी में आना जाना लगा रहता है। उन्ही में से एक हैं हमारे मुसद्दी लाल .. एक प्रोफेशनल गवाह! काफी नामी गवाह हैं .. उनकी गवाही सुनने के लिये काफी भीड़ भी जम जाती है। काफ़ी किस्से मशहूर हैं उनके हमारे यहां .. अब आपको उनके किस-किस किस्सों के बारे में बतायें .. आप खुद ही देख लिजिये ..

इस एकांकी में गवाह मुसद्दी लाल का रोल …………………… निभा रहें हैं, वकील के रोल में हैं ……………….., और मेरा क्या रोल है, ये आप खुद ही देख लिजिये!

SCENE 2: COURTROOM: INTERNAL: DAY

सुत्रधार ही जज की कुर्सी पर बैठा है। आवाज आती है – मुसद्दी लाल हाजिर हो .. ! मुसद्दी लाल हाथ में कटहरा उठाये अदालत में दाखिल होता है।

मुसद्दी लाल:

बहुत गवाही देने जाना पड़ता है ना, इसलिये कटहरा अपने साथ ही लेकर चलता हुँ।

(फिर जज की ओर देख कर)

नमस्कार जज साब .. अएं, आप नये आये हैं का जज साब, पाठक जी थें ना आप से पहले? अच्छा घूंस लेने के कारण डिस्मिस विस्मिस हो गये होंगे, पाठक जी .. कितना मना किया था, साहब को!

वकील:

ठीक है .. ठीक है .., पहले आप गीता पर हाथ रख कर ..

मुसद्दी लाल:

(बीच में टोकता हुआ)

साब, ये गीता कहां? ये तो BRO का File है!

वकील:

ठीक है .. ठीक है, आप इसी पर हाथ रख कर कसम खाइये कि जो भी कहेंगे सच कहेंगे और सच के सिवा कुछ भी नही कहेंगे।

मुसद्दी लाल:

(जज की तरफ मुड़कर)

लो, सुनो ..! ये ऐसे ही बात हो गयी .. हमरे गांव मे एक रहा कलुवा .. अ एक ठो रही उसकी भैंस .. अ उसकी भैंस को हुआ एगो भैंसा ..

वकील:

(बीच में)

अब .., कलुवा और उसकी भैंस का इस शपथ से क्या संबंध?

मुसद्दी लाल:

जो सुना रहे है वो तो सुनो ना ..!

(जज की तरफ मुड़कर)

जज साब,जब भैंस को हुआ भैंसा, तो हमको मिल गया बाबू .. हम बोला, ए बाबू, कलुवा के भैंस को हुआ है एगो भैंसा .. तो जानते हैं का बोला?

जज प्रश्नवाचक अंदाज मे देखता है

मुसद्दी लाल:

बोला .. का हो, कलुवा का भैंस पेट से था का? अब आप बताओ, बिना पेट से हुये भी का भैंसा हो सकता है? आप पढ़े लिखे लोग भी ना .. जाने का बात करत हो! अरे ऐसे ही, जब हम सच बोलेंगे ही तो सच के सिवा और का बोलेंगे .. मतबल है कोइ इस बात का .. बताओ तो जरा?

वकील:

कानून है .., शपथ लो!

मुसद्दी लाल:

हां तो ठीक है, हम कोई कानून के बाहर थोड़े ही हैं .. लाइये हम शपथ लेते है।

(जज की ओर देख कर शपथ लेता है)

मैं जज साहब और ईश्वर को हाजिर-नाजिर जान कर शपथ लेता हुँ कि जो भी कहुंगा सच कहुंगा और, सच के सिवा कुछ भी नही कहुंगा।

(फिर वकील की ओर मुड़कर)

वैसे हमरी ये बात आप भी जान लो, सात पुस्तों में से भी आजतक किसी ने झूठ नही बोला है .. सबसे बड़ा सच तो यही है!

वकील:

अच्छा ठीक है ठीक है, ये बताओ, नाम क्या है?

मुसद्दी लाल:

किसका?

वकील:

अब यहां क्या आपको गांव के लोगों के नाम पूछने के लिये बुलाया है ..अपना नाम बताइये!

मुसद्दी लाल:

मुझे लगा के आप जज साब का नाम पूछ रहें हैं के ..(दर्शकों की ओर इशारा करके) इनका नाम पूछ रहें हैं के, उनका नाम पूछ रहें हैं!

वकील:

आप अपना नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

(जज की ओर इशारा करता हुआ)

जज साहब, ये पाठक जी कहां गये आपको मालूम है का? उनके एक रिश्तेदार के केस में भी हम ही गवाह हैं।

जज:

आप से जो सवाल किया जा रहा है सिर्फ उसका जबाव दें- अपना नाम बतायें।

मुसद्दी लाल:

हुजूर माई बाप, नाम का तो ऐसा है .. मां बाप ने तो रखा था .. छोड़ें साहब, गांव में तो जो मिल जाता है हमको कहता है – माधोलाल, तो कोई कहता है माधो भइया, तो कोई माधो मियां .. माधो भाईजान .. कोई-कोई तो ..

वकील:

ओह्हो, आप एक नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

नाम लिखना है तो लिख लिजिये .. मुसद्दी लाल .. ला लड़की का!

जज:

(टेबल पर हथौड़ा बजाते हुए)

आर्डर-आर्डर, क्या आप उनको (वकील की ओर इशारा करके)वर्णमाला सिखायेंगे?

मुसद्दी लाल:

नहीं-नहीं जज साब, क्या है ना कई बार गलती हो जाती है सुनने में ना .. फिर वकील साब तो अपने पुराने आदमी हैं ..।

वकील:

बस-बस ठीक है, बाप का नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

साब, हमारे यहां बाप का नाम जुबान पर नही लातें हैं।

वकील:

क्युं? क्या शर्म आती है?

मुसद्दी लाल:

(भड़क कर)

शरम काहे को आयेगी? आप को आती है क्या बाप का नाम लेने में? लिखिये .. हरि लाल पहलवान .. हरि लाल पहलवान .. हा हाथी वाला!

वकील:

अपनी उम्र बताइये।

मुसद्दी लाल:

का ..? काहे बताबें? कोई शादि-ब्याह करवाना है का?

वकील:

ओह, आप अपनी उम्र बताइये।

मुसद्दी लाल:

हुजूर, मैं जैसा हुं .. बूढ़ा हुं .. जवान हुं, आप के सामने हुं .., बस! आपको जैसा लगे, लिख लिजिये। इसी में अदालत का टाईम निकल जायेगा!

जज:

(वकील से)

आप ये सब क्यों पूछना चाहतें है?

वकील:

सर, मैं तो बस इनकी आईडेन्टिटी इस्टैब्लिश करना चाह रहा हुँ।

जज:

ठीक है, अब मेन मुद्दे पर आइये।

वकील:

ठीक है सर, बस एक और सवाल ..

(मुसद्दी लाल से)

क्या आप जेल जा चुके हैं?

मुसद्दी लाल:

जेल ..? अरे, जेल जाना कोई खराब बात है का? महात्मा गांधी भी तो गये थें जेल .. नमक बनाने के लिये!

वकील:

और .. आप किस लिये गये थे जेल?

मुसद्दी लाल:

दारू बनाने के लिये ..!

वकील:

दारू ..? क्या आपको मालूम नहीं, नागालैंड में दारू बनाना गैरकानूनी है?

मुसद्दी लाल:

उस टाईम में तो नमक बनाना भी उतना ही गैरकानूनी था .. गांधी बाबा से क्यूं नही पूछते है .. बड़ा आदमी थें, इसलिये क्या?

जज:

(वकील से)

आप क्यों ये सवाल पूछ रहें हैं?

वकील:

साहब, मैं अदालत के सामने ये तथ्य लाना चाहता हुं कि ये आदमी झूठी गवाही देने के आरोप में भी जेल जा चुका है।

मुसद्दी लाल:

अरे, ऐसी छोटी-मोटी बातें मुझे याद नही।

वकील:

छोटी-मोटी बातें?

मुसद्दी लाल:

हां, और नही तो क्या?

जज:

(मुसद्दी लाल से)

क्या आप अपनी सफायी में कुछ कहना चाहतें है?

मुसद्दी लाल:

सफायी के बारे में ..?

जज:

हां, सफायी के बारे में ..!

मुसद्दी लाल:

जज साब, मैं बहुत सफायीपसंद इंसान हुं .. दिन में दो बार नहाता हुं .. सफायी के लिये .. लक्स साबुन से, कभी लाइफबॉय से, कभी पीयर्स से, कभी हमाम से, तो कभी ..

जज:

मैने आपसे इस मसले पर सफायी के बारे मे पुछा था!

मुसद्दी लाल:

साहब, मैं तो हमेशा साफ-सुथरा रहता हुं .. आप मुझे सुंघ कर देखिये ना .. कोई बदबू नहीं ..!

जज:

(वकील से)

आप गवाह से इस मामले के संबंध में सवाल पूछिये।

वकील:

ठीक है, जज साहब

(मुसद्दी लाल से)

आप लालू को जानते हैं?

मुसद्दी लाल:

कौन .. यादव? चीफ मिनिस्टर रह चुके हैं, बिहार के ..!

वकील:

मैं लालूराम की बात कर रहा हुं .. आप के गांव का लालूराम .. आपका पड़ोसी!

मुसद्दी लाल:

हां साहब, हम तो खूब जानत रहें .. उ लालूराम के .. अरे, लंगोटिया दोस्ती जो रही!

वकील:

अच्छा, तो ये बताइये, लालू राम की उम्र क्या होगी?

मुसद्दी लाल:

अरे साहब, जब बताया की हमरे दोस्त रहें है तो ये उमर-बीम्मर क्या है .. कोई एतना सोंच के दोस्ती थोड़े करता है?

वकील:

आप सिर्फ इतना बतायें कि आप लालूराम को जानते है या नहीं।

मुसद्दी लाल:

बिल्कुल जानते है साहब, जैसे कंपुटर मे करंट होता है .. जैसे कलम में स्याही होता है .. जैसे समोसे मे आलू होता है, वैसे ही हमरे दिल मे वो है ..

वकील:

(बीच में)

फिर आप उनकी उम्र क्यों नही बता रहे है ..? बताइये।

मुसद्दी लाल:

उनकी उम्र .. लिखिये .. यही कोई ३० ..

वकील:

३० साल ..?

मुसद्दी लाल:

३० से ६० साल के बीच है ..!

वकील:

ये कौन सी उम्र है .. ३० से ६० साल के बीच?

मुसद्दी लाल:

अब हम कोई उनके छट्ठी मे भोज तो खाय नही रहें .. जो एकदम सही-सही ही बता पायें! जो बता रहें है सो लिख लो, ना तो खुदई पूछ लेना!

वकील:

अच्छा, आप ये बताइये उनका कद कैसा है .. लंबे है या नाटे?

मुसद्दी लाल:

है तो लंबे ..

वकील:

अच्छा, लंबे है?!

मुसद्दी लाल:

हां, लंबे है .. लेकिन ..

वकील:

लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

लेकिन ये कि उनको बहुत जोर का दमा है .. तो थोड़ा झुक कर चलते है .. (झुक कर दिखाता है) इसलिये लगते नाटे ही है .. !

वकील:

(हक्का-वक्का होकर)

है ..? अच्छा उनका रंग कैसा है .. गोरा या काला?

मुसद्दी लाल:

साहब .., हैं तो गोरे ही ..

वकील:

अच्छा, गोरे है ..?

मुसद्दी लाल:

हां, गोरे है .., लेकिन ..

वकील:

अब लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

साहब हमने सच बोलने की कसम खायी है .. तो, कहेंगे तो सच ही! लालूराम को, बताया ना, बड़े जोर का दमा है .. सो चेहरा कुम्हला गया है .. देख कर कोई बता नही सकता के गोरे है या काले!

वकील:

लालूराम के बाल कैसे हैं .. सफेद या ..

मुसद्दी लाल:

सफेद है, साब ..

वकील:

अच्छा, सफेद है ..!

मुसद्दी लाल:

हां, हैं तो सफेद ही .., लेकिन ..

वकील:

अब, लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

साब, आजकल बाल कौन नही काले करता है .. सो वो भी कभी-कभी अपने बाल काले कर लेता है।

जज:

मुसद्दी लाल गवाह, आपको अदालत निर्देश देती है कि उल-जुलूल बातों से अदालत और अपना वक्त जाया न करें।

मुसद्दी लाल:

हुजुर, उल-जुलूल कहां ..? मैं तो सच बता रहा हुं और सच के सिवा कुछ भी नही .. कसम भगवान की!

वकील:

अच्छा, आप मुन्नू मियां को जानते हैं?

मुसद्दी लाल:

हां साहब, जैसे लालूराम को जानते है, वैसे ही ..

वकील:

थोड़ा विस्तार से बताये, मुन्नू मियां को कैसे जानते है?

मुसद्दी लाल:

बड़ा लालची है साहब, जब देखो तब हमरे बैठक में ही पड़ा रहता है .. पान-तमाखू के लिये! मुफतखोरी की आदत है ना साहब .. मुफत मे तो गोबर भी खिलाओ तो खा ले!

वकील:

अच्छा, मुन्नू मियां का कद कैसा है?

मुसद्दी लाल:

कद माने .. लंबाई?

वकील:

हां .. हां।

मुसद्दी लाल:

मुन्नू मियां का कद होगा .. यही कोई (हथेली नीचे की तरफ करके हाथ उपर-नीचे करता है)

वकील:

कितना ..?

मुसद्दी लाल:

इतना ..

(कंधे के बराबर हाथ रोक कर)

अ .. हां।

वकील:

(जज की ओर मुड़कर)

नोट किया जाये योर ऑनर, ये आदमी अदालत मे झूठ बोल रहा है .. जिस मुन्नू मियां का कद ये इतना बता रहा है, वो आदमी नहीं, मुर्गा है ..!

मुसद्दी लाल:

(हड़बड़ाकर, जज से )

अयं .., मुर्गा है? अभी रुकिये जज साहब .. झूठ कहां .. अभी दुसरा हाथ लगाया कहां है?

(दुसरा हाथ पहले हाथ के करीब ६ इंच नीचे लगा कर)

इतना .. मैं तो इतना ही कह रहा हुं .. ये वकील साहब सुनते ही नही हैं।

वकील:

आप सच बतायें वारदात के वक्त आप वहां थे या नही?

मुसद्दी लाल:

लो सुनो, हम काहे नही होंगे .. अरे हमरा तो काम ही है वारदात के वक्त खड़े होने का .. (फिर अपनी बात पर ही चौंक कर) मतबल .. किसी से भी पूछ लो .. हम तो वहीं थे। अब कोई घड़ी-घोड़ा तो है नहीं हम गरीबों के पास के आपको टाईम भी बता दें कि हां इतने बजे हम वहां खड़े थें और इतने बजे की वारदात है!

वकील:

ठीक है, वारदात के बारे में जो भी मालूम है वो अदालत को बताये।

मुसद्दी लाल:

(जज की ओर मुड़कर)

साहब हमरे गांव का सूरज डुबने ही वाला था ..।

वकील:

अब आपके गांव में क्या कोई निराला सूरज उगता है .. ये बताइये दिन था या रात?

मुसद्दी लाल:

(जज से)

जज साब, ये बताइये, हमरे गांव मे अगर सूरज डुब गया तो का सारे संसार मे सूरज डूब जाता है? कल को बगल गांव वाला कोई आकर अगर बता दे कि वहां सूरज नही डूबा था तो इ वकील साहब तो हमको झूठ बोलने के आरोप में जेल भिजवा देंगे ना .. ?

(फिर वकील की तरफ मुड़कर)

का वकील साहब .. है ना जायज बात? आप कल ये भी पूछ सकते है .. सूरज तुमरे ही गांव में क्यों डूबा? अरे, वो कोई हमरे मर्जी से चढ़ता गिरता है ..? वो तो होता ही रहता है .. कभी चढ़ता है कभी गिरता है! इसिलिये तो कहा है .. सुनिये:-

पर्वत से गिर कर भी संभल सकता है कोई,

नजर से जो गिर जाये उसको संभालेगा कौन?

मुसद्दी लाल अपनी बात पर खुद ही खूश होता हुआ जज की ओर देखता है।

जज:

आप शायरी छोड़िये और वकील साहब की बात का जबाव दिजिये।

मुसद्दी लाल:

(निराश होकर)

साहब, बुरा ना माने तो एक बात बोलूं .. पाठक जी ज्यादा अच्छे थें .. शेरो-शायरी में भी दखल रखतें थें।

वकील:

ये जो आरोप है लालूराम पर कि उसने अंतिम नागा का पिटायी किया है, इसके बारे में आप का क्या कहना है?

मुसद्दी लाल:

हम तो लड़ाई-झगड़े से कोसो दूर रहतें है साहब, हम क्या बता सकते है!

वकील:

तो आप मानते है, वारदात के वक्त वहां आप नही थें?

मुसद्दी लाल:

नही, हम तो वहीं थे!

(वकील की ओर देख कर सर हिला-हिला कर बोलता हुआ)

शपथ खाया है साहब, झूठ नहीं ना बोलेंगे! हमरे आगे भी दु लोग था और पीछे भी दु लोग .. बताइये कितना लोग था .. अब ऐसे में जो दिखा वोही तो बताएंगे ना आपको!

वकील:

ये जो चीखने की आवाज आयी थी, वो किस दिशा से आयी थी?

मुसद्दी लाल:

दिशा .. ? गरीबों की भी कोई दिशा होती है साहब? आप ही बताइये कि हमरे गांव में रात के अंधेरे में अगर कोई कुत्ता भूंकता है ..

(कुत्ते की आवाज निकालता है)

भूं ऽ भूं .., तो बताइये, वो आवाज किस दिशा से आती है?

जज अब कुर्सी से उठकर सुत्रधार की भूमिका मे (पीछे वकील और गवाह धीमी आवाज में जिरह करते रहते है)

जज:

बहूत सवाल किये वकील ने और हमारे रणबांकुरे मुसद्दी लाल भी डटे रहे। उसने वो जबाव दिये .. वो जबाव दिये कि मामला सुलझने की बजाय और उलझ गया, और आगे वही हुआ जो होता आया है …।

SCENE 3: COURTLROOM: INTERNAL: DAY

जज:

(टेबल पर हथौड़ा मारते हुए)

ऑर्डर-ऑर्डर, गवाह की गवाही और वकील की जिरह सुनकर अदालत अभी किसी भी नतीजे तक नही पहुंच पायी है इसलिये इस मुकद्दमे की कार्रवायी अगले सेवक डे तक के लिये मुल्तवी की जाती है।

मुसद्दी लाल:

(वकील की तरफ देख कर)

लो हो गया मुल्तवी, अरे हमको तो अगला डेट ही चाहिये था .. आप काहे इतना अनाप-शनाप सवाल पूछे जा रहे थे।

(फिर पॉकेट मे हाथ डालते हुये)

ए हुजूर आपके पास पाँच सौ का छुट्टा है का?

वकील:

किस लिये?

मुसद्दी लाल:

अरे लालूराम को वापस करना है .. सौ रुपया! हमरा फीस चारे सौ फी गवाही है ना .., जरुरत पड़े तो कभी आप भी याद किजियेगा साहब .. इस मुसद्दीलाल गवाह को ..!

पर्दा गिरता है।