Kuppusaamy on Bill Gates! 😉

Just heard, Bill Gates has resigned as the ‘Chairman of Microsoft’ after receiving a letter from kuppusaamy.
It reads:

Saar,

I have some questions for you…. Please yanswer them:

Namba wan) The keyboard alphabets are not in order, when will you launch the correct version?

Namba too) There is yeh ‘Start’ button… but no ‘Stop’ button… Rascalaa, where it is?

Namba tree) I have already learned Microsoft Word, when are you “laanching” Microsoft Sentence?

Namba for) There is yeh Recycle bin… but…there is nobody coming to collect that bin. Why???

Namba fife) Your name is Bill… But in India they orr selling computers without Bill… Why???

Yand finally yeh personal question: 
Your surname is Gates… But you are selling Windows… Why saar why??
😉 😜 😆

मुसद्दी लाल की गवाही (SKIT FOR SEWAK DAY 2010)

Mussaddi lal ki gawah

courtroom i

CAST:

  1. जज
  2. वकील
  3. गवाह

SCENE 1: COURTROOM: INTERNAL: DAY

सुत्रधार:

आप में से कई लोग कचहरी जातें हैं .. अपने केस मुकदमे के चक्कर में! कुछ लोग जज हैं .. कुछ वकील हैं, वे भी कचहरी जातें हैं .. पर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो ना जज हैं ना वकील फिर भी उनका कचहरी में आना जाना लगा रहता है। उन्ही में से एक हैं हमारे मुसद्दी लाल .. एक प्रोफेशनल गवाह! काफी नामी गवाह हैं .. उनकी गवाही सुनने के लिये काफी भीड़ भी जम जाती है। काफ़ी किस्से मशहूर हैं उनके हमारे यहां .. अब आपको उनके किस-किस किस्सों के बारे में बतायें .. आप खुद ही देख लिजिये ..

इस एकांकी में गवाह मुसद्दी लाल का रोल …………………… निभा रहें हैं, वकील के रोल में हैं ……………….., और मेरा क्या रोल है, ये आप खुद ही देख लिजिये!

SCENE 2: COURTROOM: INTERNAL: DAY

सुत्रधार ही जज की कुर्सी पर बैठा है। आवाज आती है – मुसद्दी लाल हाजिर हो .. ! मुसद्दी लाल हाथ में कटहरा उठाये अदालत में दाखिल होता है।

मुसद्दी लाल:

बहुत गवाही देने जाना पड़ता है ना, इसलिये कटहरा अपने साथ ही लेकर चलता हुँ।

(फिर जज की ओर देख कर)

नमस्कार जज साब .. अएं, आप नये आये हैं का जज साब, पाठक जी थें ना आप से पहले? अच्छा घूंस लेने के कारण डिस्मिस विस्मिस हो गये होंगे, पाठक जी .. कितना मना किया था, साहब को!

वकील:

ठीक है .. ठीक है .., पहले आप गीता पर हाथ रख कर ..

मुसद्दी लाल:

(बीच में टोकता हुआ)

साब, ये गीता कहां? ये तो BRO का File है!

वकील:

ठीक है .. ठीक है, आप इसी पर हाथ रख कर कसम खाइये कि जो भी कहेंगे सच कहेंगे और सच के सिवा कुछ भी नही कहेंगे।

मुसद्दी लाल:

(जज की तरफ मुड़कर)

लो, सुनो ..! ये ऐसे ही बात हो गयी .. हमरे गांव मे एक रहा कलुवा .. अ एक ठो रही उसकी भैंस .. अ उसकी भैंस को हुआ एगो भैंसा ..

वकील:

(बीच में)

अब .., कलुवा और उसकी भैंस का इस शपथ से क्या संबंध?

मुसद्दी लाल:

जो सुना रहे है वो तो सुनो ना ..!

(जज की तरफ मुड़कर)

जज साब,जब भैंस को हुआ भैंसा, तो हमको मिल गया बाबू .. हम बोला, ए बाबू, कलुवा के भैंस को हुआ है एगो भैंसा .. तो जानते हैं का बोला?

जज प्रश्नवाचक अंदाज मे देखता है

मुसद्दी लाल:

बोला .. का हो, कलुवा का भैंस पेट से था का? अब आप बताओ, बिना पेट से हुये भी का भैंसा हो सकता है? आप पढ़े लिखे लोग भी ना .. जाने का बात करत हो! अरे ऐसे ही, जब हम सच बोलेंगे ही तो सच के सिवा और का बोलेंगे .. मतबल है कोइ इस बात का .. बताओ तो जरा?

वकील:

कानून है .., शपथ लो!

मुसद्दी लाल:

हां तो ठीक है, हम कोई कानून के बाहर थोड़े ही हैं .. लाइये हम शपथ लेते है।

(जज की ओर देख कर शपथ लेता है)

मैं जज साहब और ईश्वर को हाजिर-नाजिर जान कर शपथ लेता हुँ कि जो भी कहुंगा सच कहुंगा और, सच के सिवा कुछ भी नही कहुंगा।

(फिर वकील की ओर मुड़कर)

वैसे हमरी ये बात आप भी जान लो, सात पुस्तों में से भी आजतक किसी ने झूठ नही बोला है .. सबसे बड़ा सच तो यही है!

वकील:

अच्छा ठीक है ठीक है, ये बताओ, नाम क्या है?

मुसद्दी लाल:

किसका?

वकील:

अब यहां क्या आपको गांव के लोगों के नाम पूछने के लिये बुलाया है ..अपना नाम बताइये!

मुसद्दी लाल:

मुझे लगा के आप जज साब का नाम पूछ रहें हैं के ..(दर्शकों की ओर इशारा करके) इनका नाम पूछ रहें हैं के, उनका नाम पूछ रहें हैं!

वकील:

आप अपना नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

(जज की ओर इशारा करता हुआ)

जज साहब, ये पाठक जी कहां गये आपको मालूम है का? उनके एक रिश्तेदार के केस में भी हम ही गवाह हैं।

जज:

आप से जो सवाल किया जा रहा है सिर्फ उसका जबाव दें- अपना नाम बतायें।

मुसद्दी लाल:

हुजूर माई बाप, नाम का तो ऐसा है .. मां बाप ने तो रखा था .. छोड़ें साहब, गांव में तो जो मिल जाता है हमको कहता है – माधोलाल, तो कोई कहता है माधो भइया, तो कोई माधो मियां .. माधो भाईजान .. कोई-कोई तो ..

वकील:

ओह्हो, आप एक नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

नाम लिखना है तो लिख लिजिये .. मुसद्दी लाल .. ला लड़की का!

जज:

(टेबल पर हथौड़ा बजाते हुए)

आर्डर-आर्डर, क्या आप उनको (वकील की ओर इशारा करके)वर्णमाला सिखायेंगे?

मुसद्दी लाल:

नहीं-नहीं जज साब, क्या है ना कई बार गलती हो जाती है सुनने में ना .. फिर वकील साब तो अपने पुराने आदमी हैं ..।

वकील:

बस-बस ठीक है, बाप का नाम बताइये।

मुसद्दी लाल:

साब, हमारे यहां बाप का नाम जुबान पर नही लातें हैं।

वकील:

क्युं? क्या शर्म आती है?

मुसद्दी लाल:

(भड़क कर)

शरम काहे को आयेगी? आप को आती है क्या बाप का नाम लेने में? लिखिये .. हरि लाल पहलवान .. हरि लाल पहलवान .. हा हाथी वाला!

वकील:

अपनी उम्र बताइये।

मुसद्दी लाल:

का ..? काहे बताबें? कोई शादि-ब्याह करवाना है का?

वकील:

ओह, आप अपनी उम्र बताइये।

मुसद्दी लाल:

हुजूर, मैं जैसा हुं .. बूढ़ा हुं .. जवान हुं, आप के सामने हुं .., बस! आपको जैसा लगे, लिख लिजिये। इसी में अदालत का टाईम निकल जायेगा!

जज:

(वकील से)

आप ये सब क्यों पूछना चाहतें है?

वकील:

सर, मैं तो बस इनकी आईडेन्टिटी इस्टैब्लिश करना चाह रहा हुँ।

जज:

ठीक है, अब मेन मुद्दे पर आइये।

वकील:

ठीक है सर, बस एक और सवाल ..

(मुसद्दी लाल से)

क्या आप जेल जा चुके हैं?

मुसद्दी लाल:

जेल ..? अरे, जेल जाना कोई खराब बात है का? महात्मा गांधी भी तो गये थें जेल .. नमक बनाने के लिये!

वकील:

और .. आप किस लिये गये थे जेल?

मुसद्दी लाल:

दारू बनाने के लिये ..!

वकील:

दारू ..? क्या आपको मालूम नहीं, नागालैंड में दारू बनाना गैरकानूनी है?

मुसद्दी लाल:

उस टाईम में तो नमक बनाना भी उतना ही गैरकानूनी था .. गांधी बाबा से क्यूं नही पूछते है .. बड़ा आदमी थें, इसलिये क्या?

जज:

(वकील से)

आप क्यों ये सवाल पूछ रहें हैं?

वकील:

साहब, मैं अदालत के सामने ये तथ्य लाना चाहता हुं कि ये आदमी झूठी गवाही देने के आरोप में भी जेल जा चुका है।

मुसद्दी लाल:

अरे, ऐसी छोटी-मोटी बातें मुझे याद नही।

वकील:

छोटी-मोटी बातें?

मुसद्दी लाल:

हां, और नही तो क्या?

जज:

(मुसद्दी लाल से)

क्या आप अपनी सफायी में कुछ कहना चाहतें है?

मुसद्दी लाल:

सफायी के बारे में ..?

जज:

हां, सफायी के बारे में ..!

मुसद्दी लाल:

जज साब, मैं बहुत सफायीपसंद इंसान हुं .. दिन में दो बार नहाता हुं .. सफायी के लिये .. लक्स साबुन से, कभी लाइफबॉय से, कभी पीयर्स से, कभी हमाम से, तो कभी ..

जज:

मैने आपसे इस मसले पर सफायी के बारे मे पुछा था!

मुसद्दी लाल:

साहब, मैं तो हमेशा साफ-सुथरा रहता हुं .. आप मुझे सुंघ कर देखिये ना .. कोई बदबू नहीं ..!

जज:

(वकील से)

आप गवाह से इस मामले के संबंध में सवाल पूछिये।

वकील:

ठीक है, जज साहब

(मुसद्दी लाल से)

आप लालू को जानते हैं?

मुसद्दी लाल:

कौन .. यादव? चीफ मिनिस्टर रह चुके हैं, बिहार के ..!

वकील:

मैं लालूराम की बात कर रहा हुं .. आप के गांव का लालूराम .. आपका पड़ोसी!

मुसद्दी लाल:

हां साहब, हम तो खूब जानत रहें .. उ लालूराम के .. अरे, लंगोटिया दोस्ती जो रही!

वकील:

अच्छा, तो ये बताइये, लालू राम की उम्र क्या होगी?

मुसद्दी लाल:

अरे साहब, जब बताया की हमरे दोस्त रहें है तो ये उमर-बीम्मर क्या है .. कोई एतना सोंच के दोस्ती थोड़े करता है?

वकील:

आप सिर्फ इतना बतायें कि आप लालूराम को जानते है या नहीं।

मुसद्दी लाल:

बिल्कुल जानते है साहब, जैसे कंपुटर मे करंट होता है .. जैसे कलम में स्याही होता है .. जैसे समोसे मे आलू होता है, वैसे ही हमरे दिल मे वो है ..

वकील:

(बीच में)

फिर आप उनकी उम्र क्यों नही बता रहे है ..? बताइये।

मुसद्दी लाल:

उनकी उम्र .. लिखिये .. यही कोई ३० ..

वकील:

३० साल ..?

मुसद्दी लाल:

३० से ६० साल के बीच है ..!

वकील:

ये कौन सी उम्र है .. ३० से ६० साल के बीच?

मुसद्दी लाल:

अब हम कोई उनके छट्ठी मे भोज तो खाय नही रहें .. जो एकदम सही-सही ही बता पायें! जो बता रहें है सो लिख लो, ना तो खुदई पूछ लेना!

वकील:

अच्छा, आप ये बताइये उनका कद कैसा है .. लंबे है या नाटे?

मुसद्दी लाल:

है तो लंबे ..

वकील:

अच्छा, लंबे है?!

मुसद्दी लाल:

हां, लंबे है .. लेकिन ..

वकील:

लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

लेकिन ये कि उनको बहुत जोर का दमा है .. तो थोड़ा झुक कर चलते है .. (झुक कर दिखाता है) इसलिये लगते नाटे ही है .. !

वकील:

(हक्का-वक्का होकर)

है ..? अच्छा उनका रंग कैसा है .. गोरा या काला?

मुसद्दी लाल:

साहब .., हैं तो गोरे ही ..

वकील:

अच्छा, गोरे है ..?

मुसद्दी लाल:

हां, गोरे है .., लेकिन ..

वकील:

अब लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

साहब हमने सच बोलने की कसम खायी है .. तो, कहेंगे तो सच ही! लालूराम को, बताया ना, बड़े जोर का दमा है .. सो चेहरा कुम्हला गया है .. देख कर कोई बता नही सकता के गोरे है या काले!

वकील:

लालूराम के बाल कैसे हैं .. सफेद या ..

मुसद्दी लाल:

सफेद है, साब ..

वकील:

अच्छा, सफेद है ..!

मुसद्दी लाल:

हां, हैं तो सफेद ही .., लेकिन ..

वकील:

अब, लेकिन क्या?

मुसद्दी लाल:

साब, आजकल बाल कौन नही काले करता है .. सो वो भी कभी-कभी अपने बाल काले कर लेता है।

जज:

मुसद्दी लाल गवाह, आपको अदालत निर्देश देती है कि उल-जुलूल बातों से अदालत और अपना वक्त जाया न करें।

मुसद्दी लाल:

हुजुर, उल-जुलूल कहां ..? मैं तो सच बता रहा हुं और सच के सिवा कुछ भी नही .. कसम भगवान की!

वकील:

अच्छा, आप मुन्नू मियां को जानते हैं?

मुसद्दी लाल:

हां साहब, जैसे लालूराम को जानते है, वैसे ही ..

वकील:

थोड़ा विस्तार से बताये, मुन्नू मियां को कैसे जानते है?

मुसद्दी लाल:

बड़ा लालची है साहब, जब देखो तब हमरे बैठक में ही पड़ा रहता है .. पान-तमाखू के लिये! मुफतखोरी की आदत है ना साहब .. मुफत मे तो गोबर भी खिलाओ तो खा ले!

वकील:

अच्छा, मुन्नू मियां का कद कैसा है?

मुसद्दी लाल:

कद माने .. लंबाई?

वकील:

हां .. हां।

मुसद्दी लाल:

मुन्नू मियां का कद होगा .. यही कोई (हथेली नीचे की तरफ करके हाथ उपर-नीचे करता है)

वकील:

कितना ..?

मुसद्दी लाल:

इतना ..

(कंधे के बराबर हाथ रोक कर)

अ .. हां।

वकील:

(जज की ओर मुड़कर)

नोट किया जाये योर ऑनर, ये आदमी अदालत मे झूठ बोल रहा है .. जिस मुन्नू मियां का कद ये इतना बता रहा है, वो आदमी नहीं, मुर्गा है ..!

मुसद्दी लाल:

(हड़बड़ाकर, जज से )

अयं .., मुर्गा है? अभी रुकिये जज साहब .. झूठ कहां .. अभी दुसरा हाथ लगाया कहां है?

(दुसरा हाथ पहले हाथ के करीब ६ इंच नीचे लगा कर)

इतना .. मैं तो इतना ही कह रहा हुं .. ये वकील साहब सुनते ही नही हैं।

वकील:

आप सच बतायें वारदात के वक्त आप वहां थे या नही?

मुसद्दी लाल:

लो सुनो, हम काहे नही होंगे .. अरे हमरा तो काम ही है वारदात के वक्त खड़े होने का .. (फिर अपनी बात पर ही चौंक कर) मतबल .. किसी से भी पूछ लो .. हम तो वहीं थे। अब कोई घड़ी-घोड़ा तो है नहीं हम गरीबों के पास के आपको टाईम भी बता दें कि हां इतने बजे हम वहां खड़े थें और इतने बजे की वारदात है!

वकील:

ठीक है, वारदात के बारे में जो भी मालूम है वो अदालत को बताये।

मुसद्दी लाल:

(जज की ओर मुड़कर)

साहब हमरे गांव का सूरज डुबने ही वाला था ..।

वकील:

अब आपके गांव में क्या कोई निराला सूरज उगता है .. ये बताइये दिन था या रात?

मुसद्दी लाल:

(जज से)

जज साब, ये बताइये, हमरे गांव मे अगर सूरज डुब गया तो का सारे संसार मे सूरज डूब जाता है? कल को बगल गांव वाला कोई आकर अगर बता दे कि वहां सूरज नही डूबा था तो इ वकील साहब तो हमको झूठ बोलने के आरोप में जेल भिजवा देंगे ना .. ?

(फिर वकील की तरफ मुड़कर)

का वकील साहब .. है ना जायज बात? आप कल ये भी पूछ सकते है .. सूरज तुमरे ही गांव में क्यों डूबा? अरे, वो कोई हमरे मर्जी से चढ़ता गिरता है ..? वो तो होता ही रहता है .. कभी चढ़ता है कभी गिरता है! इसिलिये तो कहा है .. सुनिये:-

पर्वत से गिर कर भी संभल सकता है कोई,

नजर से जो गिर जाये उसको संभालेगा कौन?

मुसद्दी लाल अपनी बात पर खुद ही खूश होता हुआ जज की ओर देखता है।

जज:

आप शायरी छोड़िये और वकील साहब की बात का जबाव दिजिये।

मुसद्दी लाल:

(निराश होकर)

साहब, बुरा ना माने तो एक बात बोलूं .. पाठक जी ज्यादा अच्छे थें .. शेरो-शायरी में भी दखल रखतें थें।

वकील:

ये जो आरोप है लालूराम पर कि उसने अंतिम नागा का पिटायी किया है, इसके बारे में आप का क्या कहना है?

मुसद्दी लाल:

हम तो लड़ाई-झगड़े से कोसो दूर रहतें है साहब, हम क्या बता सकते है!

वकील:

तो आप मानते है, वारदात के वक्त वहां आप नही थें?

मुसद्दी लाल:

नही, हम तो वहीं थे!

(वकील की ओर देख कर सर हिला-हिला कर बोलता हुआ)

शपथ खाया है साहब, झूठ नहीं ना बोलेंगे! हमरे आगे भी दु लोग था और पीछे भी दु लोग .. बताइये कितना लोग था .. अब ऐसे में जो दिखा वोही तो बताएंगे ना आपको!

वकील:

ये जो चीखने की आवाज आयी थी, वो किस दिशा से आयी थी?

मुसद्दी लाल:

दिशा .. ? गरीबों की भी कोई दिशा होती है साहब? आप ही बताइये कि हमरे गांव में रात के अंधेरे में अगर कोई कुत्ता भूंकता है ..

(कुत्ते की आवाज निकालता है)

भूं ऽ भूं .., तो बताइये, वो आवाज किस दिशा से आती है?

जज अब कुर्सी से उठकर सुत्रधार की भूमिका मे (पीछे वकील और गवाह धीमी आवाज में जिरह करते रहते है)

जज:

बहूत सवाल किये वकील ने और हमारे रणबांकुरे मुसद्दी लाल भी डटे रहे। उसने वो जबाव दिये .. वो जबाव दिये कि मामला सुलझने की बजाय और उलझ गया, और आगे वही हुआ जो होता आया है …।

SCENE 3: COURTLROOM: INTERNAL: DAY

जज:

(टेबल पर हथौड़ा मारते हुए)

ऑर्डर-ऑर्डर, गवाह की गवाही और वकील की जिरह सुनकर अदालत अभी किसी भी नतीजे तक नही पहुंच पायी है इसलिये इस मुकद्दमे की कार्रवायी अगले सेवक डे तक के लिये मुल्तवी की जाती है।

मुसद्दी लाल:

(वकील की तरफ देख कर)

लो हो गया मुल्तवी, अरे हमको तो अगला डेट ही चाहिये था .. आप काहे इतना अनाप-शनाप सवाल पूछे जा रहे थे।

(फिर पॉकेट मे हाथ डालते हुये)

ए हुजूर आपके पास पाँच सौ का छुट्टा है का?

वकील:

किस लिये?

मुसद्दी लाल:

अरे लालूराम को वापस करना है .. सौ रुपया! हमरा फीस चारे सौ फी गवाही है ना .., जरुरत पड़े तो कभी आप भी याद किजियेगा साहब .. इस मुसद्दीलाल गवाह को ..!

पर्दा गिरता है।

SCHOOL INSPECTION (HINDI SKIT-FOR SEWAK DAY)

ACT I

Scene 1:INT: क्लासरुम

‘सेवक पाठशाला’लिखा बैनर दीवार पर लगा है, साइड में वर्ल्ड मैप लगा है। एक टेबल पर रजिस्टर और छड़ी रखी है, एक कुर्सी भी साथ में रखी है। बच्चे शोरगुल कर रहें हैं।

मास्टर एक हाथ में किताब लेकर लंगड़ाते हुए दाखिल होता है।

मास्टर:- ऐ … शांत रहो।

बच्चे:- गुड मार्निंग सर।

मास्टर:- गुड मार्निंग।

(मास्टर जैसे ही कुर्सी पर बैठने की कोशिश करता है, एक लड़का कुर्सी खींच लेता है जिससे मास्टर गिर जाता है।)

मास्टर:- (डांट लगाते हुए) तुं मुर्ख है क्या? (टेबल से छड़ी उठाकर पीठ पर बजाते हुए) चल कान पकड़!

(लड़का मास्टर के कान की तरफ हाथ बढ़ाता है।)

मास्टर:- (डांटते हुए) अबे, मेरे नही, अपनें कान पकड़!

(लड़का अपने कान पकड़ लेता है। मास्टर कुर्सी पर बैठ कर रजिस्टर खोलता है और हाजिरी लेना शुरू करता है।)

– होशियार सिंह

– यस सर

– अमरीक सिंह

– जी, सर

– फुलतुड़ु सिंह

– हाजिर श्रीमान

– तोता राम

– जी सर

– रलिया राम

– उपस्थित श्रीमान

मास्टर:- रलिया, तुं कल स्कूल क्यों नही आया था?

रलिया:- मास्टर साब, कल मैं गिर पड़ा था, लग गयी थी।

मास्टर:- कहाँ गिर पड़ा था, … क्या लग गयी थी?

रलिया:- मास्टर साब, बिस्तर पर गिर पड़ा था, नींद लग गयी थी।

मास्टर:- (छड़ी लगाते हुए) हप! … बैठ।

(रलिया बैठ जाता है।)

मास्टर:- ठीक है बच्चों, सब शांत होकर बैठो और मेरी बात सुनो।

बच्चे:- यस सर/ जी सर।

मास्टर:- कल स्कूल इंस्पेक्टर यहाँ आएगा, आप खुराफात थोड़ा कम करना और वो जो सवाल पुछे उसका जबाव ठीक-ठीक देना।

बच्चे:- जी सर।

मास्टर:- और सुनो, कल होशियार सिंह और अमरीक सिंह यहाँ नही आएंगे।

(होशियार सिंह और अमरीक सिंह पीछे खुसर-पुसर करतें है।)

होशियार सिंह:- चल बे, कल हमारी छुट्टी।

अमरीक सिंह:- ना-ना, आना तो पड़ेगा, क्या पता कल मिठाई बटे यहाँ और मास्टर हमारा हिस्सा मार ले।

होशियार सिंह:- ठीक है यार, हम चुपचाप आकर पीछे बैठ जाएंगे।

– पर्दा गिरता है

Scene 2: INT: क्लासरुम

घंटी की आवाज के साथ पर्दा खुलता है। बच्चे शोरगुल कर रहे हैं। स्कूल इंस्पेक्टर का प्रवेश।

स्कूल इंस्पेक्टर:- शांत,… बच्चों। … मास्टर साहब कहाँ हैं?

फुलतुड़ु सिंह:- … सर, … कोई आने वाला है, मास्टर साब दारु लाने गयें हैं।

स्कूल इंस्पेक्टर:- है? … क्या स्कूल है! … दारु?

बच्चे:- जी सर।

स्कूल इंस्पेक्टर:- अच्छा, आप लोग शांत हो जाओ। मैं कुछ सवाल पुछुंगा, आप उनके जबाव दो।

बच्चे:- यस सर!

स्कूल इंस्पेक्टर:- अच्छा ये बताओ आपमें होशियार कौन है?

रलिया:- सर, होशियार मैं हुँ। मैं क्लास में फर्स्ट आता हुँ।

होशियार सिंह:- (शर्ट खींच कर बैठाते हुए) ऐ बैठ। सर, होशियार तो मैं हुँ, मेरा नाम होशियार सिंह है।

स्कूल इंस्पेक्टर:- अच्छा अच्छा! (छड़ी से मैप की तरफ इशारा करते हुए) आप बताओ – अमरीका कहाँ है?

होशियार सिंह:- सर, … अमरीका? … वो तो बाथरुम में छिपा है .., इधर आया ही नही।

स्कूल इंस्पेक्टर:- हैं .. ? (छड़ी टेबल पर पटकते हुए) अच्छा ठीक है, तुम बैठो।

स्कूल इंस्पेक्टर (फुलतुड़ु कि ओर मुड़कर):- अच्छा बेटे, आप खड़े होकर बताओ, आप बड़े होकर क्या करोगे?

फुलतुड़ु (खड़ा होकर):- सर, शादी।

स्कूल इंस्पेक्टर:- नही .. नही, मेरा मतलब है, बड़े होकर क्या बनोगे?

फुलतुड़ु:- दुल्हा बनुंगा।

स्कूल इंस्पेक्टर (खीज कर):- ओहो, I mean to say तुम बड़े होकर क्या हासिल करना चाहते हो?

फुलतुड़ु:- सर, दुल्हन!

स्कूल इंस्पेक्टर (गुस्से से):- अबे, मतलब बड़े होकर मम्मी-पापा के लिये क्या करोगे?

फुलतुड़ु:- बहू लाउंगा, और क्या?

स्कूल इंस्पेक्टर (अब चीखते हुए):- हरामखोर, तुम्हारे मां-बाप तुम से क्या चाहते है?

फुलतुड़ु (हकलाते हुए):- प .. पोता।

स्कूल इंस्पेक्टर (सर के बाल नोचता हुआ):- हे भगवान .., अबे जिन्दगी का क्या मकसद है?

फुलतुड़ु सिंह (दो अंगुलि दिखाते हुए):- सर, हम दो हमारे दो .. ।

स्कूल इंस्पेक्टर (गुस्से से पागल होता हुआ):- अबे .., बैठ .. बैठ .., बैठ जा तूं।

फुलतुड़ु सिंह (बुदबुदाता हुआ):- मैं तो बैठा ही था, आपने ही तो खड़ा किया मुझे।

(तभी मास्टर हड़बड़ाते हुए क्लास में दाखिल होता है।)

स्कूल इंस्पेक्टर:- जी, आप कौन हैं?

मास्टर:- जी .. जी, मैं .. मै, इस क्लास का चीटर हुँ।

स्कूल इंस्पेक्टर:- अच्छा, आप टीचर हैं! क्या पढ़ाया है आपने इन्हे? इनका डिस्सीप्लिन भी ठीक नही है।

मास्टर:- नहीं सर, ये तो बहुत अच्छे बच्चे हैं। सारा कुछ जानते हैं। इनका सिलेबस भी कंप्लीट है। आप पुछिये, सर!

स्कूल इंस्पेक्टर:- (रलिया की तरफ ईशारा करते हुए) अच्छा आप बताओ, द्रौपदी का चीरहरण किसने किया था?

(रलिया चुपचाप सर नीचे झुका लेता है।)

मास्टर:- हाँ-हाँ, बताओ रलिया बेटे, द्रौपदी की साड़ी किसने खींची थी?

रलिया:- (स्कूल इंस्पेक्टर की तरफ देखता है फिर सर नीचे झुकाते हुए कहता है) सर, पिता जी ने!

मास्टर:- क्या बोलता है?

रलिया:- सर, द्रौपदी मेरी माँ का नाम है।

स्कूल इंस्पेक्टर:- अच्छा!? (मास्टर की ओर आश्चर्य से देखते हुए लड़के को बैठने का ईशारा करता है।) बैठो!

(फिर तोताराम की तरफ ईशारा करते हुए) अच्छा ये बताओ, शिव जी का धनुष किसने तोड़ा?

तोताराम:- धनुष? (आश्चर्य से) .. क्या मालूम! हम तो स्कूल आए ही नही थें, .. छुट्टी पर थें, सर!

स्कूल इंस्पेक्टर:- (होशियार की ओर ईशारा करते हुए) तुम बताओ, क्या जानते हो?

होशियार सिंह (रुँआसा होकर):- मैं कुछ नही जानता, सर! मैं तो सबसे सीधा हुँ, मैनें धनुष देखा भी नही! ये तो हर चीज में युँ ही मेरा नाम लगा देतें हैं।

स्कूल इंस्पेक्टर:- क्या मास्टर साहब? बच्चे तो कुछ जानते ही नहीं!

मास्टर:- सर, बच्चे है, टुट गया होगा गलती से। कुछ ले-दे कर फिक्स कर लेंगे, सर। चलिये ना, कुछ पीने-खाने का भी इंतजाम किया हुआ है। बच्चे भी आपके लिए कुछ लेकर आए हैं, सर।

स्कूल इंस्पेक्टर:- आप मुझे रिश्वत देना चाहते हैं?

मास्टर:- नहीं सर, ये तो प्यार है जो हम आपके साथ बाँटना चाहते हैं!

(एक बच्चे को देने का ईशारा करता है।) दे ना!

(बच्चा उठकर एक बरतन स्कूल इंस्पेक्टर को पकड़ा देता है।)

सर, आपके लिए।

स्कूल इंस्पेक्टर:- क्या है ये?

बच्चा:- दूध है, सर।

(स्कूल इंस्पेक्टर डब्बा लेकर पीना शुरू करता है, पर मुँह लगाते ही थू-थू करने लगता है।)

स्कूल इंस्पेक्टर:- ये दूध है? .. कहाँ से लेकर आया है?

बच्चा:- सर, रात में बिल्ली आधा दूध पी गयी थी, माँ ने कहा – बांकी फेंक मत, मास्टर साब के लिए ले जा – उसको क्या पता बिल्ली का जूठा है!

(स्कूल इंस्पेक्टर डब्बा नीचे गिरा देता है।)

मास्टर:- अरे, तुँ मेरे लिये जूठा दूध लेकर आया था!

(मास्टर लात मार कर डब्बे को फेंक देता है। बच्चा इसपर जोर से रोने लगता है।)

स्कूल इंस्पेक्टर:- क्यों रो रहा है अब, चुप हो जा?

बच्चा (सुबकते हुए):- सर, मेरा छोटा भाई रात को इसी डब्बे मे पेशाब करता था, आपने फेंक दिया, अब किसमें करेगा?

स्कूल इंस्पेक्टर (हिकारत से):- क्या .., इसी डब्बे में?

मास्टर:- सर, बच्चे हैं सर! … नासमझ हैं, इनकी कोई गलती नही।

स्कूल इंस्पेक्टर:- हां-हां, गलती तो आपकी है जो आप बच्चों को पढ़ाने कि बजाय उनके घर से सामान मंगवाते रहते हैं। गलती हमारी भी है कि हमने आप जैसे शिक्षक बहाल कर रखे है इन नौनिहालों के लिये!

मास्टर:- आप गलत समझ रहे हैं, सर! ऐसा कुछ भी नही है! आइये ना, मिल बैठ कर सेट्टल कर लेते है यहीं पर!

स्कूल इंस्पेक्टर:- बहुत खराब माहौल है, मै इसकी कंप्लेन शिक्षा मंत्री तक करुंगा।

मास्टर:- अजीब अहमक हैं! देखते है क्या कर लेते है आप भी! शिक्षा मंत्री तो मेरे जीजा का साला है! जाइये जरुर किजीये! कहाँ-कहाँ से चले आते है, सब!

– पर्दा गिरता है

Scene 3: INT: शिक्षा मंत्री का दफ्तर

शिक्षा मंत्री कुर्सी पर बैठा पान चबा रहा है। स्कूल इंस्पेक्टर पास में खड़ा है। मंत्री ईशारा करता है, एक अर्दली थूकदान लेकर आता है।

शिक्षा मंत्री (थूकदान में पीक थूक कर):- हुँ .. !

स्कूल इंस्पेक्टर:- बहुत खराब हालत है सरकार!

शिक्षा मंत्री:- आतो .., बैठिये ना पहिले!

स्कूल इंस्पेक्टर:- सर, मै तो हक्का-बक्का हुँ, बच्चों को ये तक मालूम नही कि शिव का धनुष किसने तोड़ा!

शिक्षा मंत्री:- हुँ!

(अर्दली को आवाज लगाकर)

ऐ .., जरा पीए साहब को बुलाना, स्कूल को पीछले तीन साल में क्या-क्या ईशु हुआ, उसका लिस्ट लेकर आयेगा।

(पीए लिस्ट लेकर आता है।)

पीए:- सर, ये रहा लिस्ट!

शिक्षा मंत्री:- हाँ, तो पढ़िये ना .. क्या-क्या ईशु हुआ है? अभी हम दुध का दुध और पानी का पानी कर देते है!

पीए:- सर, टेबल, कुर्सी, पिढ़िया, ब्लैक बोर्ड, खल्ली ..।

शिक्षा मंत्री:- हप! अरे, इसमे शिव का धनुष है का?

पीए:- नही सर, इसमे तो शिव का धनुष है ही नही!

शिक्षा मंत्री:- लो .., देखो! (स्कूल इंस्पेक्टर की तरफ देखते हुए) का जी? यही सब गलत-सलत बात पुछते है, बच्चा सब से?

स्कूल इंस्पेक्टर:- सर .. ?

शिक्षा मंत्री:- हप .. ! अरे, जब इशुए नही हुआ है तो तोड़ेगा कौन? ऐसेही मास्टर को भी बुरा-भला कहता है ..! अरे, ऊ तो हमरे साले का जीजा है! … तुम ऐसे ही इतना कह रहा था!

स्कूल इंस्पेक्टर:- सर, गलती हो गयी।

शिक्षा मंत्री:- का गलती हो गयी .. ? अरे जब शिव का धनुष हम इशुए नही किये त उसको तोड़ेगा कौन .. ? सेवक पाठशाला को भी बदनाम करता है, नौकरिए हम ले लेंगे .. !

स्कूल इंस्पेक्टर:- (घबरा कर) नह .. नही सर!

(शिक्षा मंत्री के पांव पर गिरने लगता है।)

शिक्षा मंत्री:- हप .. ! हप .. !!  हप .. !!!

– पर्दा गिरता है!